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Analysis-जसवंत सिंह खालड़ा की बॉयोपिक पर आधारित चर्चित फिल्म “सतलुज” का विश्लेषण।

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Analysis

Daily Dose 24/7

फ़िल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है…

फिल्म 1980 और 1990 के दशक में पंजाब के अशांत दौर के दौरान रहस्यमय ढंग से लापता हुए हजारों लोगों लावारिस बताकर किए गए अंतिम संस्कारों के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ने वाले जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी दिखाती है..

फ़िल्म में किसी भी चरित्र का नाम नहीं बदला गया है.. और ना ही कहानी में कोई बदलाव किया गया..फ़िल्म देखकर समझ आया कि क्यों इसे सिनेमाघरों में रिलीज़ नहीं होने दिया जा रहा था..

फ़िल्म में सबने इतना अच्छा काम किया है कि आपको लगेगा ही नहीं आप फ़िल्म देख रहे हैं..ये फ़िल्म उनके लिए है जो ठहरकर फ़िल्म देखते हैं…
 
दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालरा की भूमिका में हैं, अर्जुन रामपाल सीबीआई ऑफिसर समुद्र सिंह बने हैं और ठहर ठहर कर बोलते हुए अच्छे लग रहे हैं..कंवलजीत बिट्टा सिंह की भूमिका में है..लेकिन फ़िल्म में जो एसएसपी सुग्गा है उसने ऐसा किरदार निभाया है कि उससे चिढ़ हो गई थी..
 
सबसे ज़्यादा दुख मुझे ये लिखा हुआ देखकर हुआ कि जसवंत सिंह की बॉडी नोट फाउंड..
 
मन में यही आया कि जिसने लावारिसों की बॉडी की लड़ाई लड़ी, आख़िर में उसका शरीर ही नहीं मिला…
दरअसल, जसवंत सिंह खालरा अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में डायरेक्टर थे, पर साथ ही ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट भी थे। एक दिन जब उनके दोस्त और साथ काम करने वाले प्यारा सिंह लापता हुए, तो उनकी खोज में वह श्मशान घाट तक पहुंच गए। वहां जसवंत सिंह को पता चला कि वहां बड़ी संख्या में लाशों को लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसी की जांच करते हुए और तह में गए तो फेक एनकाउंटर की बात सामने आई।
 
तब जसवंत सिंह ने साल 1995 में जे.एस. ढिल्लो के साथ मिलकर एक प्रेस नोट तैयार किया था,
जिसमें बताया था कि पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर किया, फिर उन शवों को श्मशान घाटों पर ले जाती है और वहां उन्हें लावारिस बता कर अंतिम संस्कार करवा दिया जाता है.
 
ख़ुद उन्होंने सबसे पहले कई श्मशान घाट जाकर वहां पड़ताल की और पता चला कि करीब 25 हजार सिख लापता हैं, जो साल 1984 से 1994 के बीच लापता हुए थे।
जसंवत सिंह खालरा ने दावा किया कि पुलिस ने उनमें से करीब 2000 सिखों का या तो लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया या नदी में उनकी लाशें बहा दीं।
जसवंत सिंह के इस प्रेस नोट के कुछ महीनों बाद जसवंत सिंह खालरा गायब हो गए थे.. और बाद में पुलिस ने उनका फेक एनकाउंटर कर दिया था।
credit to social media
 
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