jamshedpur-कलगीधर मध्य विद्यालय विवाद प्रकरण: जिला शिक्षा अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम द्वारा आदेश जारी।

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श्री कलगीधर मध्य विद्यालय की अवैध कमेटी भंग।
श्री पिंटू कुमार सिंह को विद्यालय का प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में प्राधिकृत किया गया।
जमशेदपुर- टुईलाडूंगरी स्थित कलगीधर मध्य विद्यालय में पिछले लंबे समय से चल रहे कमेटी विवाद में आखिरकार जिला शिक्षा अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम द्वारा 22 अप्रैल को आदेश जारी करते हुए विद्यालय प्रबंध समिति श्री कलगीधर मध्य विद्यालय टुईलाडूंगरी के सचिव को वित्तीय दायित्व के निर्वहन पर रोक लगाया गया।
और विगत 4 अप्रैल को उक्त विद्यालय का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रबंध समिति के सचिव एवं प्रधानाचार्य के विरुद्ध लगाये गये आरोपों को प्रथम दृष्टया सत्य पाया गया। एवं विद्यालय का शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण अव्यवस्थित पाया गया। उपरोक्त तथ्यों को लेकर विभाग द्वारा नये तदर्थ कमेटी का गठन किया गया। फिलहाल तदर्थ समिति विद्यालय के समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का संचालन करेगी। उक्त व्यवस्था नयी प्रबंध समिति के विधिवत गठन तक प्रभावित रहेगी।
नये आदेश के मुताबिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक लंबोदर आचार्य को तत्काल प्रभाव से उनके दायित्व से अलग करते हुए श्री पिंटू कुमार सिंह को विद्यालय का प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में प्राधिकृत किया गया।
इस सच्चाई की लड़ाई में जीत की जानकारी आम संगत को आज गुरुद्वारा श्री कलगीधर टुईलाडूंगरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी गई।
सच्चाई की हुई जीत।
टुईलाडूंगरी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार सतबीर सिंह ने अपने मात्र 9 महीने के कार्यकाल में क ई ऐतिहासिक निर्णय लिए जिसमें मुख्य रूप से जागृति यात्रा का भव्य स्वागत एवं रिफ्यूजी कालोनी से निकला नगर किर्तन का स्वागत हेतु पूरे क्षेत्र की साफसफाई करवाकर पालकी साहिब का स्वागत करना और उसमें सफलता करना हासिल ।
कलगीधर मध्य विद्यालय को शिक्षा विभाग के प्रोसेस के आधार पर संवैधानिक अधिकार द्वारा पूर्वजों द्वारा बनाई गई गुरु घर की संपत्ति को कड़ी मेहनत और लगन से वापस लेना एक बड़ी चुनौती थी। सरदार सतबीर सिंह एवं उनकी पूरी टीम ने स्थानीय संगत के सहयोग से ये लड़ाई लड़ी और मकसद में कामयाब रहे।
और अन्य गुरुद्वारा कमेटी के अधीन चल रहे स्कूलों के लिए उदाहरण सेट किया। इसके अलावा सरदार सतबीर सिंह ने कलगीधर मध्य विद्यालय के फर्जी स्टाफ़ को भी एक कड़ा संदेश दिया कि गुरुद्वारा कमेटी से उलझने का परिणाम गलत होता है। इसके लिए उन्हें समय समय पर सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का भी सहयोग मिलता रहा