Faith-जन्म से मुस्लिम होने के बावजूद मधुबाला जपुजी साहिब की दीवानी थी..

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आख़िर क्यों होती है अंधेरी के गुरुद्वारे में ये अरदास…
“हे सच्चे पातशाह, आपकी बच्ची मधुबाला की तरफ से लंगर-प्रसाद की यह सेवा हाजिर है…”
यह केवल एक अरदास नहीं है, बल्कि हिंदी सिनेमा की सबसे हसीन और दिग्गज अदाकारा मधुबाला की गुरु नानक देव जी के चरणों में उस अटूट श्रद्धा का प्रमाण है, जो आज भी मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे में हर साल गूंजती है।
हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं..उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर में कई सुपरहिट फ़िल्में दीं..लेकिन मधुबाला का जीवन बाहर से जितना चकाचौंध भरा था, अंदर से उतना ही दर्द और अकेलेपन से घिरा था।
बहुत कम उम्र में पूरे परिवार का बोझ उठाना, फिर अभिनेता दिलीप कुमार के साथ बेहद करीबी रिश्ता टूटना और उसी दौरान दिल की एक जानलेवा बीमारी का पता चलना…उन्होंने अपने आखिरी दिनों में काफ़ी दर्द झेला.. और इन सबने उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था।
लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि जन्म से मुस्लिम होने के बावजूद मधुबाला जपुजी साहिब की दीवानी थी.. और उनकी दीवानगी इस हद तक थी कि उनके आख़िरी वक़्त तक भी जपुजी साहिब की किताब उनके बैग में रखी थी..
मधुबाला बेहद शर्मीली और साफ दिल की इंसान थीं। उन्होंने अपनी इस आस्था को कभी पब्लिसिटी या अखबारों की सुर्खियां नहीं बनने दिया और ये बात कभी ना खुलती अगर एक फ़िल्म की शूटिंग के दौरान संगीत निर्देशक एस मोहिंदर उनका बैग ना देखते…
दरअसल हुआ यूँ कि किसी फ़िल्म के सेट पर शूटिंग चल रही थी..मधुबाला की शूटिंग में देरी थी तो ख़ाली समय में मधुबाला ने अपने पर्स से एक किताब निकाली और अपना सिर ढककर पढ़ने लगी..
थोड़ी ही देर में सेट पर उन्हें बुलाया गया तो वो अपनी किताब और पर्स मोहिंदर जी को देकर शॉट देने चली गई..
इसके बाद जब मोहिंदर जी ने वो किताब देखी तो वो फ़ारसी भाषा में लिखा जपुजी साहिब था..
जब मधुबाला अपना शॉट पूरा करके आई तो महेंद्र जी ने उनसे पूछा कि ये सब क्या है?
तब उन्होंने जो बताया वो काफ़ी चौंकाने वाला था, उन्होंने कहा कि, उनके पास नाम , फेम , पैसा सब कुछ है लेकिन सुकून नहीं है, मैं अंदर से टूट चुकी थी,
तब मेरे एक जानने वाले मुझे अंधेरी के गुरुद्वारे ले गए, दर्शन करने के बाद मैं ग्रंथि साहब को अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने मुझे रोज़ जपुजी साहिब का पाठ करने को कहा..
चूँकि मुझे गुरुमुखी नहीं आती, इसलिए मैंने किताब फ़ारसी में छपी किताब मंगवा ली..उस दिन से ये किताब मेरे पास है और मैं बिना नागा किए इसका पाठ करती हूँ.. मुझे अजीब सा सुकून और शांति मिलती है.
इस बात का खुलासा ख़ुद प्रसिद्ध संगीत निर्देशक एस. मोहिंदर जिन्होंने ऐतिहासिक पंजाबी फिल्म “नानक नाम जहाज है” का संगीत दिया था ने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि शूटिंग के सेट पर व्यस्तताओं के बीच भी मधुबाला किस तरह श्रद्धा से सिर ढककर जपुजी साहिब का पाठ किया करती थीं।
उनके निधन से लगभग 7 साल पहले, जब उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब मधुबाला खुद मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारा साहिब की कमेटी के पास गईं थीं और उन्होंने गुरुद्वारे के सेवादारों के सामने हाथ जोड़कर अपनी एक अंतिम इच्छा रखी थी कि
बाबा जी, गुरु नानक पातशाह के प्रकाश पर्व पर आपके यहाँ जो भी लंगर बनता है, उसकी पूरी सेवा मेरी झोली में डाल दी जाए। इसका पूरा खर्च मैं उठाऊंगी।
गुरुद्वारा कमेटी उनकी इस श्रद्धा को देखकर दंग रह गई थी और उनकी इच्छा को सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसके बाद, जीवन के आखिरी सात वर्षों तक वह हर साल गुरुपर्व पर वहां जाती थीं, घंटों कीर्तन सुनती थीं और लंगर की पूरी सेवा संभालती थीं।
यहाँ तक कि फिल्मों के एग्रीमेंट में भी वह यह शर्त लिखवाती थीं कि गुरुपर्व के दिन वह कोई शूटिंग नहीं करेंगी ताकि पूरा दिन गुरुद्वारे में बिता सकें।
23 फ़रवरी 1969 को मात्र 36 वर्ष की आयु में जब मधुबाला का निधन हो गया, तो उनके पिता अताउल्लाह खान रोते हुए अंधेरी गुरुद्वारे पहुंचे। और उन्होंने कमेटी से कहा कि
“मेरी बेटी दुनिया से चली गई, लेकिन गुरु नानक के चरणों में शुरू की गई उसकी यह लंगर सेवा कभी बंद नहीं होनी चाहिए। अब से इसका सारा खर्च मैं दूंगा।”
यही कारण है कि मधुबाला के गुज़र जाने के दशकों बाद भी, आज तक हर साल गुरुपर्व के धार्मिक सभा की अरदास में अंधेरी गुरुद्वारे की संगत पूरी श्रद्धा के साथ कहती है…
“हे सच्चे पातशाह, आपकी बच्ची मधुबाला की तरफ से लंगर-प्रसाद की यह सेवा हाजिर है, इसे अपनी दरगाह में कबूल करना…”
क्या आपको मधुबाला के जीवन का ये आध्यात्मिक पहलू पता था.?
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ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गौरीशंकर रोड जुगसलाई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो, एवं सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य), गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।
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