Advice-झूठे आरोपों पर सख्त कानून बनाये सीजीपीसी-गुरदीप सिंह सलुजा

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SIKH MEDIA
झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर चुनावी माहौल खराब करने वालों पर सख्त कानून बनाया जाए।
जमशेदपुर- अमृतवेला परिवार के संस्थापक सरदार गुरदीप सिंह सलुजा ने जमशेदपुर के सिखों की सर्वोच्च संस्था सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सविनम्र बेनती करते हुए सलाह देना चाहते हैं कि गुरुद्वारा कमेटियों के चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा एक दूसरे पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर चुनावी माहौल खराब करने पर एक सख्त कानून बनाया जाए।
जिसमें मुख्य रूप से उम्मीदवारों को चुनाव के समय झूठे आरोपों को सबूतों के साथ सिद्ध करने और प्रमाण के साथ सच्चाई सामने लाने की हिदायत दी जाए। यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रतिद्वंद्वी पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाकर गुरु घर के प्रधान पद की सेवा लेना चाहते हैं तो इसका प्रमाण सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंपना होगा। ताकि संगत को भी सच्चाई पता चल सके। अमूमन देखा गया है कि प्रत्याशी भोली भाली संगत को अपने प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी पर झूठे आरोप लगाकर बदनाम करके संगत को गुमराह कर देते हैं और संगत का वोट लेकर जीत जाते हैं।
इस संबंध में सीजीपीसी द्वारा एक जनरल बॉडी मीटिंग बुलाया जाए जिसमें वरिष्ठ एवं बुद्धिजीवी सिख प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए और उनसे भी राय ली जाए।
इस मामले पर सीजीपीसी को संज्ञान लेने की जरूरत है। यदि सीजीपीसी अपने संविधान में संशोधन करते हुए इस प्रकार का सख्त कानून बनाये तो गुरुद्वारों के चुनाव में शालीनता और आपसी विवाद पर विराम लग सकता है। प्रधान पद के चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वी पर किसी प्रकार का आरोप लगाकर साबित नहीं कर सके तो उनकी उम्मीदवारी को रद्द करने वाले कानून बनाये जाए। और उक्त कानून का सख्ती से पालन किया जाए।
कानून बनने से क्या होगा।
यदि ऐसा कानून सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा बनाया जायेगा तो उम्मीदवार एक दूसरे पर झूठे और संगीन आरोप लगाने से बचेंगे। एक दूसरे पर बेवजह झूठे आरोप लगाकर मीडिया में देने से जो सिख समाज की बदनामी होती है। उसपर काफी हद तक विराम लगेगी।चूंकि गुरुद्वारों में प्रधान पद सेवा करने के लिए होता है। इसलिए इस पद पर आप अपनी काबलियत एवं रहत मर्यादा के आधार पर सेवा प्राप्त करें।
यदि किसी उम्मीदवार का सहयोगी या सपोर्टर दूसरे उम्मीदवार के प्रति गलत और झूठी अफवाह फैलाने का प्रयास करता है तो उससे भी सबूत मांगा जाए। सबूत नहीं देने की परिस्थितियों में उस पर पंथक कार्रवाई करते हुए उसका समाजिक बहिष्कार करना चाहिए।
सीजीपीसी को बेनती है कि उक्त सलाह पर ध्यान दें। ताकि गुरुद्वारा कमेटियों के चुनाव में एक दूसरे पर झूठे और बेबुनियादआरोप प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला खत्म हो सके।