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माता साहिब कौर की याद में कीर्तन दरबार

know more about the place of mata sahib kaur ji in sikh history

Daily Dose News05/11/2023/

सिख इतिहास की वीरांगना और सिखों के दशम गुरु गोविन्द सिह जी की धर्म पत्नी माता साहिब कौर की 342वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए तार कंपनी (इंद्रानगर) गुरुद्वारा साहिब में कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। रविवार को स्त्री सत्संग सभा की बीबीयों ने गुरबाणी कीर्तन गायन कर उनकी वीरता को याद किया।


जुगलसलाई के गुरप्रीत सिंह निक्कू और कदमा के हरिंदर सिंह ने इस मौके पर अपनी मधुर स्वर में गुरबाणी कीर्तन किया। इस अवसर पर सिख नौजवान सभा के नव नियुक्त प्रधान अमरीक सिंह और तार कंपनी (इंद्रानगर) गुरुद्वारा साहिब के प्रधान सरदार अमरजीत सिंह को सम्मानित किया गया। स्त्री सत्संग सभा की प्रधान बीबी कमलजीत कौर की अगुवाई में बलजिंदर कौर, मनमीत कौर अमृत कौर, राजवंत कौर, जगीर कौर, कुलवंत कौर और गुरमीत कौर की देखरेख में बहुत ही अच्छे तरीके से आयोजित किया गया।

तार कंपनी (इंद्रानगर) गुरुद्वारा साहिब के प्रधान सरदार अमरजीत सिंह बताया कि स्त्री सत्संग सभा यह समागम पिछले तीन दशकों से सफलता पूर्वक आयोजित करती आ रहीं हैं। समागम के अंत में संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। कीर्तन दरबार को सफल बनाने में स्त्री सत्संग सभा के सदस्यों के अलावा कमिटी प्रधान सरदार अमरजीत सिंह, अमरजीत सिंह, गुरमीत सिंह, हरदीप सिंह, गुरदीप सिंह और बलबीर सिंह का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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माता साहिब कौर का परिचय: माता साहिब कौर, सिखों के दशम गुरु गोविन्द सिह जी की पत्नी थीं।। उनका विवाह से पहले नाम ‘जीतो’ था। उनके सुन्दर रूप के कारण उनको सभी ‘सुन्दरी’ बुलाने लगे। उनके विवाह के बाद दोनों नामों से सभी बुलाते रहे। खालसा साजना पर गुरु जी ने सह परिवार अमृतपान किया (मतलब गुरु दीक्षा ली) तो माता जीतो / सुँदरी जी का नाम साहेब कौर रखा गया।

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