jamshedpur-पंथ में बिखराव का एक बड़ा कारण गुटबाज़ी- भगवान सिंह सीजीपीसी प्रमुख

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प्रचारकों और धार्मिक नेताओं की भी बड़ी ज़िम्मेदारी-भगवान सिंह
जमशेदपुर- सीजीपीसी प्रधान सरदार भगवान सिंह ने आज सिख पंथ में बिखराव एवं आपसी टकराव पर चिंता जताते हुए कहा कि पंथ की तरक्की में रुकावट डालने वाले कई कारण हो सकते हैं, लेकिन गुटबाज़ी और अपने पद की लालसा इसमें एक बड़ी रुकावट बन जाती है।

उन्होंने कहा कि जब सोच यह हो जाती है कि “मेरा गुट मज़बूत रहे और मैं अगली बार प्रधान बनूं, या अगली बार मेरी बारी आएगी की नहीं, तो पंथ का फ़ायदा पीछे छूट जाता है और अपना नीजी फ़ायदा आगे आ जाता है।
पद अपने आप में बुरा नहीं है। ज़िम्मेदारी के साथ सेवा करना अच्छी बात है। लेकिन जब सेवा के बजाय पद ही मकसद बन जाता है, तो सोच बदल जाती है। फिर चीज़ें इस हिसाब से होने लगती हैं कि अगली बार कौन सा फ़ैसला हमारे लिए फ़ायदेमंद होगा.
इसी तरह, प्रचारकों और धार्मिक नेताओं की भी बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। संगत उनसे सच्चाई, निडरता और उसूलों के मार्गदर्शन की उम्मीद करती है। उन्होंने प्रचारकों के लिए भी कहा कि अगर कोई प्रचारक अपनी रोज़ी-रोटी, परिवार या भविष्य की चिंता में किसी प्रबंधक की नाराज़गी के डर से अपना मत बदल लेता है तो ये पंथ के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यहां मकसद किसी पर इल्ज़ाम लगाना नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम ऐसा माहौल बना सकते हैं जहाँ सिख प्रचारक सच बोल सकें और प्रबंधक उसकी बात को बर्दाश्त कर सके?
सरदार भगवान सिंह ने सिख इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास हमें बाबा बुड्डा जी जैसे महान सिख ग्रंथी से जो निडर सेवा, विनम्रता और सिद्धांतों के प्रति वफ़ादारी की प्रेरणा देता है, हमें भी यह सोचने की ज़रूरत है कि हमारी वफ़ादारी किसी व्यक्ति, पद या गुट के प्रति है या गुरु की शिक्षाओं और पंथ के हितों के प्रति है।
उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधकों को अनुरोध किया कि अगर प्रबंधक अपने पद से ऊपर सेवा को रखे और प्रचारक प्रबंधकों के डर से ऊपर सच्चाई को रखे और संगत गुटों के बजाय सिद्धांतों को अहमियत दे,तो पंथ बिखरने के बजाय नई सोच और तरक्की का रास्ता खुल सकता है।
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गुरुद्वारा प्रबंधकों से अपील: वे पद को संगत की अमानत समझें।
प्रचारकों से अपील: वे निडर होकर सच और सिद्धांत की बात बोलें, लेकिन गुरमत के तथ्यों और नैतिकता को ध्यान में रखें।
संगत से अपील: वे किसी गुट के पीछे चलने के बजाय काम,सिद्धांत और पंथिक हित को अपना उद्देश्य बनाएं।
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आइए हम आइडिया चुनें, व्यक्ति नहीं।
आइए हम पंथिक हित चुनें, गुट नहीं।
आइए हम सेवा चुनें, पद नहीं।
क्योंकि प्रधान कौन बनेगा, यह तो समय का फैसला है; लेकिन पंथ किस दिशा में जाएगा, यह हमारी सोच का फैसला है।
ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गौरीशंकर रोड जुगसलाई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो, एवं सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य), गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।
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