amazing-आतंकवाद के दौर में जब सुनील दत्त गये स्वर्ण मंदिर तो क्या हुआ था?know more about this incident.

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प्रिया दत्त ने सुनाया पिता सुनील दत्त का वो किस्सा जब वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुंचे थे और उन्हें अंदर जाने के लिए पुलिस ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने की सलाह दी। 

दिवंगत एक्टर सुनील दत्त और नरगिस की बेटी प्रिया दत्त ने हाल ही में उस दौर का किस्सा सुनाया जब वह अपने पिता के साथ साल 1987 में मुंबई से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर तक पदयात्रा पर निकली थीं। उन दिनों पंजाब के हालात खराब थे और चारों ओर डर का माहौल था। प्रिया ने उन दिनों के याद करते हुए कहा कि गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया गया था और वहां उस पवित्र स्थल पर जाने के लिए पिता सुनील दत्त को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि जैसे ही वह अंदर दाखिल हुए, गुरुद्वारे के अंदर मौजूद लोगों ने, जिनके पास बंदूकें थीं, उन्होंने कहा कि सुनील दत्त हमारी जिम्मेदारी हैं। सुनील उस समय एक राजनेता थे लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ये ‘पदयात्रा’ राजनीतिक कदम का हिस्सा नहीं था।

साल 1980 के दशक के अंत में पंजाब में उग्रवादियों ने स्वर्ण मंदिर पर कब्ज़ा कर लिया था और इसी दौरान सुनील ने शांति के लिए पदयात्रा पर चलने का फैसला किया। मुंबई में केवल दस लोगों के साथ शुरू हुआ ये मार्च रास्ते में ये और तेजी से गति पकड़ता गया और जब वे अमृतसर पहुंचे तो सुनील के साथ कई और लोग भी शामिल हो गए थे।

पुलिस ने सुनील दत्त को अंदर जाने से रोका था

प्रिया ने साइरस ब्रोचा के साथ बातचीत में कहा, ‘स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से एक रात पहले पुलिस वाले आए और उन्होंने हमें बैठाया। मेरे पिता से उन्होंने कहा कि अंदर आपके लिए कोई सिक्यॉरिटी नहीं है। आप मंदिर के अंदर नहीं जा सकते। हमारी सलाह है कि आप बुलेट प्रूफ़ जैकेट पहन लें।’

amazing-सुनील दत्त ने बुलैट प्रूफ जैकेट पहनने के लिए रखी थी शर्त

सुनील ने उनकी बातों पर जवाब में हां कहा, लेकिन फिर उन्होंने उनसे उन सबके लिए बुलेट प्रूफ जैकेट देने को कहा जो उनके साथ थे। पुलिस ने उनसे कहा कि उनके पास इतने जैकेट नहीं हैं तो दत्त ने भी जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। प्रिया ने बताया कि ये उनके पापा का पुलिस को पीछे हटने का तरीका था क्योंकि वे बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए काफी जिद कर रहे थे। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए कहा- तब मेरे पिता ने उनसे कहा था कि मैं बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनूंगा।

सादे कपड़ों में पुलिस को देख उन्हें वो लोग पहचान गए थे

प्रिया ने उस दिन को याद किया जब वे स्वर्ण मंदिर के अंदर गए थे और कहा, ‘उस समय स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया गया था। प्रिया ने आगे कहा, ‘हम अंदर गए और वहां सादे कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मी भी थे जिन्होंने कहा कि हम आपके साथ आएंगे। अंदर से लोगों ने उन्हें पहचान लिया और उन्होंने कहा कि आपको मंदिर में आने की अनुमति नहीं है। सुनील दत्त की जिम्मेदारी हमारी है, वे उन लोगों में से थे जिन्होंने मंदिर पर कब्ज़ा किया था।

‘अंदर घुसते ही भीड़ ने सुनील दत्त को उठा लिया’

प्रिया ने बताया कि अंदर जाते ही भीड़ ने सुनील को उठा लिया और उनका जमकर स्वागत किया। उन्होंने बताया, ‘मंदिर के अंदर हर किसी के पास बंदूकें थीं लेकिन वे खुश थे, उन्होंने उनका स्वागत किया। मैं चारों ओर बंदूकधारियों, युवाओं को देख रही थी।’उन्होंने बताया कि जब वे प्रार्थना के लिए अंदर गए तो उनके साथ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने अपने चेहरे ढके हुए थे क्योंकि वे वॉन्टेड लोग थे और उनके पास बंदूकें थीं।

‘वहां बहुत सारा प्यार, इतना सम्मान था’

उन्होंने ये भी कहा, ‘वे सभी युवा लोग थे जिन्होंने अलग-अलग वजहों से हथियार उठा लिए थे। वहां बड़ी संख्या में महिलाएं भी काले कपड़ों में थीं।’ प्रिया ने कहा कि सुनील ने अंदर कई सीनियर लोगों से बातें की और उनके साथ आए सभी लोगों ने घूमकर कई अन्य लोगों से बातें की। वहां बहुत सारा प्यार, इतना सम्मान था और थोड़ी देर बाद हमें लगने लगा कि वे सभी हमारे देश का हिस्सा हैं। उन्हें बस सही राह दिखाने की जरूरत है।’ बता दें कि ‘पदयात्रा’ तब आयोजित की गई थी जब उग्रवादियों ने खुद को मंदिर परिसर के अंदर रोक लिया था। बाद में उन्होंने केंद्रीय बलों के सामने आत्मसमर्पण किया था।

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