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religious-ॐ ह्रीं विपदतारिणी दुर्गायै नम: के मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ जादूगोड़ा.

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DAILY DOSE NEWS

(सौरभ कुमार जादूगोड़ा)

विधि-विधान से जादूगोड़ा बराज डैम में हुई मां विपदतारिणी की पूजा संपन्न। जादूगोड़ा मुख्य मार्ग से बराज डैम के समीप मां विपतारिणी की पूजा-अर्चना धूमधाम से भक्तिभाव से की गई।

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इस दौरान महिलाओं ने मां दुर्गा के विपतारिणी रूप के आगे मत्था टेककर अपने परिवार की सुख- समृद्धि की कामना की साथ ही एक- दूसरे की मांग में सिंदूर लगाकर सदा सुहागिन बने रहने की कामना की। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु पहुंचे और मां तारिणी के चरणों में माथा टेका। पुजारियों ने भी श्रद्धालु महिलाओं की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर हर विपदा से दूर रहने का आशीर्वाद दिया। विपत्तारिणी पूजा देवी शक्ति को समर्पित एक शुभ उपासना है जो देवी काली की भी अभिव्यक्ति करता है।

विपत्तारिणी पूजा रथ यात्रा के बाद और बहुधा रथ के यात्रा से पहले हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की मंगलवार और शनिवार के दिन मनाया जाता है। यह पूजा मुख्यतः बंगाल, ओडिशा, असम के क्षेत्र में मनाई जाती है। बंगाली समाज की महिलाओं द्वारा विशेष तौर पर माँ विपतारिणी की पूजा श्रद्धापूर्वक प्रत्येक वर्ष की जाती है। पूजा कमेटी की ओर से दिवाकर पात्रो बताते हैं कि बीते 14 वर्षों से यहां पूजा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता रहा है। बिपतारिणी पूजा आषाढ़ महीने में रथ यात्रा और उलट रथ के बीच पड़ने वाले शनिवार और मंगलवार को मनाई जाती है। इस साल 28 जून, शनिवार और 1 जुलाई मंगलवार को बिपतारिणी पूजा होगी।

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मौके पर मौजूद चंपावती पात्रो ने बताया कि यह पूजा के पूर्व महिलाओं ने दिनभर उपवास रखकर विपतारिणी व्रत भी रखा। इस पूजा में तेरह किस्म की सामाग्री और उस सामग्री को तेरह की गिनती से गिनकर मां का भोग लगाया जाता है। भोग में पूड़ी, पुआ, पान,सुपारी,लांग ईलायची मूंगदाल, फल, खीर, मिष्ठान , चेरी इत्यादि से भोग लगाया जाता है। इस पूजा में सुहागिन महिलाएं सारा दिन उपवास करती हैं। यह पूजा परिवार के मंगल के लिए और परिवार को आपदा से रक्षा के लिए की जाती है। मां विपतारिणी की पूजा- अर्चना करने के लिए काली मंदिर में शनिवार सुबह से ही महिलाए , पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं व्रत रखकर मां के दरबार में पहुंची पूजा- अर्चना की साथ ही मन्नतें भी मांगी। पूजा के उपरांत व्रतियों अन्य भक्तों के बीच में मां का प्रसाद वितरण किया गया। पंडाल में भक्ति का वातावरण देखते ही बन रहा था, और लोगों में गहरी आस्था झलक रही थी।

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