CGPC NEWS-सिखों के धार्मिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी-Bhagwan Singh

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सिखों ने सदैव मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और कमजोरों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है-CGPC Jamshedpur
जमशेदपुर। सेंटर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, झारखंड ने उत्तराखंड में हाल ही में निहंग सिंहों के साथ हुई घटनाओं, तख्त श्री हजूर साहिब से जुड़े कृपाण संबंधी विवादों तथा देश के विभिन्न हिस्सों में सिखों के धार्मिक अधिकारों पर हो रहे हस्तक्षेप पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
कमेटी का कहना है कि उत्तराखंड में हुई घटना में उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले निहंग सिंहों पर हमला किया गया, जिसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कृपाण का सहारा लिया। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जो निष्पक्ष न्याय की भावना के विपरीत हैं।
कमेटी ने कहा कि कृपाण सिख धर्म के पांच ककारों में से एक है और यह कोई आक्रमण का हथियार नहीं, बल्कि आत्मरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सिखों ने सदैव मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और कमजोरों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है।
सेंटर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने महाराष्ट्र में तख्त श्री हजूर साहिब से संबंधित कृपाणों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों की चर्चाओं तथा देश के विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों और सिख संस्थानों से जुड़े विवादों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारों को सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
कमेटी ने कहा कि देश की आजादी, सीमाओं की सुरक्षा तथा मानव अधिकारों की रक्षा में सिख कौम का योगदान अतुलनीय रहा है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी द्वारा कश्मीरी पंडितों की रक्षा हेतु दिया गया बलिदान और खालसा पंथ का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि सिख परंपरा सदैव सर्वधर्म समभाव, मानवता और “सरबत दा भला” के सिद्धांत पर चली है।
कमेटी ने हाल ही में एक सिख ट्रक चालक पर हुए हमले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति के जीवन और सम्मान पर खतरा हो तो आत्मरक्षा उसका वैधानिक और नैतिक अधिकार है। सिख परंपरा में श्री साहिब (कृपाण) का प्रयोग अन्याय या उत्पीड़न के लिए नहीं, बल्कि स्वयं तथा दूसरों की रक्षा के लिए किया जाता है।
सेंटर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की है कि सिखों के धार्मिक अधिकारों, कृपाण धारण करने की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक गुरुद्वारों की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही देश के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर बैठे सिख प्रतिनिधियों से भी अपील की गई है कि वे इन मुद्दों पर खुलकर अपनी आवाज उठाएं।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म प्रेम, भाईचारे, मानव सेवा और “सरबत दा भला” का संदेश देता है। किसी भी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करना लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना है, और इसी भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
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