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SURPRISE-जमशेदपुर के दो ऐसे गुरुद्वारे जहाँ “गुरु” हीं नहीं हैं।

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SURPRISE

SIKH MEDIA JAMSHEDPUR

सर्वे के मुताबिक़ शहर मे दो गुरुद्वारे हैं जिसमें से एक परसुडीह एवं दूसरे नंबर पर बागबेड़ा।

ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गौरीशंकर रोड जुगसलाई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टुईलाडुंगरी, सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य) गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।

जमशेदपुर: क्या आपको पता है कि जमशेदपुर शहर में दो ऐसे गुरुद्वारे भी हैं जहाँ “गुरु” नहीं हैं। यानी वह गुरुद्वारा तो है लेकिन फिलहाल वहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश नहीं है। सिख मीडिया डेली डोज़ न्यूज़ चैनल के एक सर्वे के मुताबिक़ शहर मे दो गुरुद्वारे जिसमें से एक परसुडीह एवं दूसरे नंबर पर बागबेड़ा में ऐसे गुरुद्वारे हैं। जहाँ ना तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश है ना ही कोई देखभाल या मासिक सत्संग कार्यक्रम।

इसमें से एक गुरुद्वारा जो परसुडीह क्षेत्र में स्थित है। और वहां की देखभाल ना होने से गुरुद्वारा साहिब की इमारत धीरे धीरे खंडहर में तब्दील हो रही है। सिख मीडिया के संवाददाता ने वहां के प्रधान सरदार रंजीत सिंह मथारु जी से औपचारिक मुलाकात की। और गुरुद्वारा साहिब के बारे में जानकारी ली।
बातचीत के दौरान परसुडीह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार रंजीत सिंह मथारु ने संवाददाता को बताया कि यह गुरुद्वारा जमशेदपुर के सबसे प्राचीन गुरुद्वारों मे से एक है। जिसका निर्माण सन् 1939 में करवाया गया था। तब इस जगह पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश था। और संगत बड़ी श्रद्धा और उत्साह से गुरु घर की सेवा करते थे।

लेकिन अब विगत कुछ वर्षों से गुरुद्वारा साहिब में न तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश होता है और न हीं कोई धार्मिक समागम होता है। इसके लिए उन्होंने वजह बताया कि परसुडीह क्षेत्र में सिखों के गिनती के मात्र चार या पांच घर ही हैं। संगत नहीं होने से गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा अनुसार देखभाल नहीं हो पाती है। इसलिए पिछले कुछ सालों से गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश नहीं है। हालांकि सरदार रंजीत सिंह मथारु जी ने कहा कि इस बाबत उन्होंने सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार भगवान् सिंह से चर्चा की थी। सीजीपीसी प्रधान सरदार भगवान् सिंह ने इस पर चिंता जताई। और कहा कि आप वहां गुरु साहिब का प्रकाश करवाएं और ग्रंथी सिंह का वेतन का खर्च भी सीजीपीसी द्वारा किया जाएगा।

मथारु जी ने कहा संगत की कमी होने का भी एक बहुत बड़ा कारण है। क्योंकि यदि संगत नहीं होगी तो अकेले ग्रंथी सिंह को भी गुरु साहिब के प्रकाश एवं सुखासन के वक्त परेशानी होगी। और ऐसे में बेअदबी भी हो सकती है।

लेकिन अब उन्हें गुरुद्वारा साहिब की जमीन जो लगभग सैकड़ों वर्गफुट में है। उसकी चिंता सता रही है। इस बारे मे उन्होंने सिख मीडिया के चीफ़ एडिटर सरदार गुरदीप सिंह सलूजा से विचार विमर्श किया और गुरु घर की जगह का कोई उचित इस्तेमाल करने की सलाह ली। जिससे उक्त जगह से अपने सिख समुदाय का भला हो सके।
इसपर सरदार गुरदीप सिंह सलुजा ने भी चिंता जताई और कहा कि इस बारे में अपने शहर के सिख समुदाय को जल्दी से जल्दी नोटिस लेना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि वहां की कम संगत को देखकर किसी और स* मा* ज द्वारा गुरु घर पर कब्जा कर लिया जाए। जैसे हरिद्वार में गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी समेत कई गुरुद्वारे सिख समुदाय के हाथ से निकल गए।सरदार गुरदीप सिंह सलुजा ने कहा कि जमशेदपुर के बड़े गुरुद्वारा कमेटियों को उक्त दोनों गुरुद्वारों के जिर्णोद्धार के विषय पर विचार करना चाहिए। इसके लिए सलुजा ने महाराजा रणजीत सिंह का हवाला देते हुए कहा कि अपने समय में सिख महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिरों और मस्जिदों का जिर्णोद्धार किया था। तो क्या स्थानीय गुरुद्वारा कमेटियां मिलकर अपने ही उक्त गुरुद्वारा साहिब की जगह को सिक्योर( महफूज़) नहीं कर सकते। इस बारे मे बड़ी कमेटियों को संज्ञान लेने की जरूरत है।

बागबेड़ा गुरुद्वारा साहिब का भी यही हाल.

ऊपर देखें वीडियो⬆️

कमोवेश जमशेदपुर के बागबेड़ा गुरुद्वारा साहिब का भी यही हाल है। जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश नहीं है। बागबेड़ा गुरुद्वारा साहिब का सर्वे करने पर पता चला कि कभी कभार वहां छबील आदि की सेवा वहां की सिख संगत करती है। किंतु वहां भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश नहीं है। नाम के लिए एक कोने मे निशान साहिब जरूर लगा दिखाई देता है। लेकिन वह भी काफी पुराना एवं क्षतिग्रस्त हो चुका है।
सिख मीडिया के चीफ़ एडिटर सरदार गुरदीप सिंह सलुजा ने जमशेदपुर की सिख संगत से अपील है कि सभी मिलकर एक पुख्ता निर्णय लेकर उक्त गुरुद्वारों पर ध्यान आकर्षित करें नहीं तो आने वाले समय में स्थितियां बदल सकतीं हैं। गुरु घर की जगह हाथ से जा भी सकती है।


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