jamshedpur-श्री गुरु तेगबहादुर जी का शहीदी समागम मानगो गुरुद्वारा साहिब में आज। हज़ारों की संख्या में संगत होगी नतमस्तक।
jamshedpur

jamshedpur
sikh media jamshedpur
मानगो गुरुद्वारा साहिब में बड़ी श्रद्धा और नम्रता से बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा।
ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टुईलाडुंगरी, सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य) देशी डिलाइट्स,रिफ्यूजी कालोनी, बीबी इंद्रजीत कौर( President Istri Satsang Sabha Gourishanker Road) गुरु रामदास सेवा दल सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।
जमशेदपुर: पिछले 17 नवंबर से सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एवं तख्त श्री हरमंदिर जी पटना कमेटी के संयुक्त तत्वावधान से कोल्हान के विभिन्न गुरुद्वारों मे चल रहे लड़ीवार शहीदी समागम मे आज यानी 25 नवंबर को मानगो गुरुद्वारा साहिब में बड़ी श्रद्धा और नम्रता से बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने का अनुमान है।
बता दें कि उक्त कार्यक्रम श्री गुरु तेगबहादुर जी, भाई मतिदास भाई सतिदास भाई दयाला जी के 350 वें शहीदी के संदर्भ में पूरे विश्व में मनाया जा रहा है।सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एवं तख्त श्री हरमंदिर जी पटना कमेटी के सौजन्य से जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान के गुरुद्वारों में बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है।
क्या है इतिहास।
दिल्ली के चांदनी चौक पर औरंगजेब द्वारा इस्लाम न कबूलनामे पर श्री गुरु तेगबहादुर जी एवं उनके सेवक भाई मतिदास भाई सतिदास भाई दयाला जी पर अत्याचार करते हुए शहीद किया गया। औरंगजेब को श्री गुरु तेगबहादुर जी ने जबरन इस्लाम कबूल करने को लेकर स्पष्ट किया कि कोई भी सत्ता किसी की आस्था या विश्वास छीनने का अधिकार नहीं रखती. धर्म आत्मा का विषय है। सत्ता का नहीं। औरंगजेब को यह बात बहुत बुरी लगी नतीजा यह हुआ कि 24 नवंबर 1675 को चांदनी चौक पर गुरुजी का सार्वजनिक रूप से सिर कलम कर दिया गया।
गुरु तेग बहादुर
9वें सिख गुरु थे, जो अपनी शिक्षाओं, बहादुरी और शहादत के लिये पूजनीय थे।
प्रारंभिक जीवन और वंश: उनका जन्म 21 अप्रैल, 1621 को अमृतसर में छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद और माता नानकी के यहाँ हुआ था। उनके तपस्वी स्वभाव के कारण उनका मूल नाम त्याग मल रखा गया था।
शिक्षा और प्रशिक्षण: उन्होंने एक समग्र शिक्षा प्राप्त की, प्रसिद्ध भाई गुरदास से शास्त्रों में और बाबा बुद्ध से मार्शल आर्ट में प्रशिक्षित हुये।
योगदान और नेतृत्व: गुरु के रूप में उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब में 116 भजनों का योगदान दिया, सिख शिक्षाओं के प्रसार के लिये बड़े पैमाने पर यात्रा की तथा चक-नानकी शहर की स्थापना की, जो बाद में श्री आनंदपुर साहिब शहर के रूप में विकसित हुआ ।
शहादत और विरासत: वर्ष 1675 में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ उनके रुख के लिये मुगल सम्राट के आदेश पर सार्वजनिक रूप से सिर कलम कर दिया गया।
इस सर्वोच्च बलिदान के कारण उन्हें ‘हिंद की चादर’ या ‘भारत की ढाल’ की शाश्वत उपाधि मिली।