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jamshedpur-निशान सिंह को भगवान सिंह ने किया सम्मानित.

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पालकी साहिब के भव्य स्वागत की चहुओर हो रही सराहना

सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (सीजीपीसी) के प्रधान सरदार भगवान सिंह ने साकची गुरुद्वारा के प्रधान सरदार निशान सिंह को नगर कीर्तन के दौरान पालकी साहिब के जोरदार और अविस्मरणीय स्वागत के लिए शनिवार को स्मारिका देकर सम्मानित किया। यह आयोजन कोल्हान क्षेत्र की संगत और सभी गुरुद्वारा कमेटियों के लिए एक सुखद अहसास का प्रतीक बना, जहां पूरे जमशेदपुर में इस भव्य स्वागत की खूब प्रशंसा हुई।(नीचे पढें पूरी खबर)

ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टुईलाडुंगरी, सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य) देशी डिलाइट्स,रिफ्यूजी कालोनी, बीबी इंद्रजीत कौर( President Istri Satsang Sabha Gourishanker Road) गुरु रामदास सेवा दल सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सरजामदा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।

सम्मान ग्रहण करते हुए साकची गुरुद्वारा के प्रधान सरदार निशान सिंहने प्रमुखता से कहा कि इस सम्मान का पूरा श्रेय गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को जाता है, जिनकी सटीक प्लानिंग और परिश्रम की बदौलत साकची गुरुद्वारा कमिटी की सराहना चहुँओर हो रही है। इस सम्मान से पूरी कमिटी भविष्य में और अधिक सामाजिक और धार्मिक समागम को व्यापक पैमाने पर करने के लिए प्रेरित महसूस कर रही है। सम्मान लेने के दौरान वरीय उपाध्यक्ष सरदार सतनाम सिंह घुम्मण भी उपस्थित थे।(नीचे पढें पूरी खबर)

सीजीपीसी के महासचिव सरदार अमरजीत सिंह, जो मंच का संचालन कर रहे थे, जैसे ही साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान निशान सिंह का नाम पुकारा तो पूरा दरबार साहिब “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयकारों से गूंज उठा। सरदार निशान सिंह और सरदार सतनाम सिंह घुम्मण को सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह, चेयरमैन सरदार गुरमीत सिंह तोते और सरदार शैलेन्द्र सिंह ने स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया।(नीचे पढें पूरी खबर)

धार्मिक दृष्टिकोण से यह सम्मान गुरु ग्रंथ साहिब जी की पालकी के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव की जीत है, जो सिख धर्म के मूल सिद्धांतों – सेवा, समानता और संगत की एकता को मजबूत करता है। व्यावहारिक रूप से, यह आयोजन सामाजिक समरसता और धार्मिक समागमों को बड़े पैमाने पर आयोजित करने की प्रेरणा देता है, जिससे समुदाय में आपसी सहयोग और उत्साह बढ़ता है।

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