GPCS NEWS-सीजीपीसी साकची गुरुद्वारा को हाशिए पर रख रही है,यह सीजीपीसी की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है-निशान सिंह

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साकची गुरुद्वारा के प्रधान निशान सिंह का आरोप – सीजीपीसी कर रही है सौतेला व्यवहार, कहा- व्यक्तिगत मतभेद अपनी जगह पर धार्मिक आयोजन मामलों पर संवाद होते रहने चाहिए
साकची गुरुद्वारा साहिब के प्रधान निशान सिंह ने शनिवार को सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (सीजीपीसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि साकची गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजीपीसी न केवल साकची गुरुद्वारा को हाशिए पर रख रही है, बल्कि उसके विरुद्ध भ्रांतियां फैलाने का कार्य भी कर रही है।
ये समाचार आप गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टुईलाडुंगरी, सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य) गुरु रामदास सेवा दल सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सरजामदा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट, गौरीशंकर रोड स्त्री सत्संग सभा प्रधान बीबी इंद्रजीत कौर,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।

निशान सिंह ने कहा कि इस वर्ष सिखों के नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी तथा भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दियाला जी की 350वीं शहादत स्मृति के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय शहीदी नगर कीर्तन (जागृति यात्रा) से साकची गुरुद्वारा कमिटी को बिलकुल अलग-थलग रखा गया। जबकि साकची गुरुद्वारा को ‘सेंट्रल गुरुद्वारा’ के नाम से पुरे कोल्हान में जाना जाता है। उनके अनुसार, सीजीपीसी का यह कदम न केवल अन्याय है बल्कि इसे धार्मिक अपराध की संज्ञा भी दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि शहीदी नगर कीर्तन से कुछ दिन पूर्व सीजीपीसी द्वारा सभी गुरुद्वारों के प्रधान और महासचिवों की बैठक बुलाई गई थी, परंतु साकची गुरुद्वारा प्रबंधन को उस बैठक में आमंत्रित तक नहीं किया गया। निशान सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों साकची गुरुद्वारा को नजरअंदाज किया गया और इसका जवाब सीजीपीसी प्रबंधन को देना चाहिए।

निशान सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा – इतिहास गवाह है कि जब भी कोई बड़ा पंथक आयोजन होता है तब साकची गुरुद्वारा साहिब ही वह स्थान रहा है जहाँ पंथिक जत्थेबंदियों का ठहराव होता आया है। लेकिन इस बार द्वेष की भावना से प्रेरित होकर न तो कोई संवाद किया गया और न ही जागृति यात्रा के रात्रि विश्राम की व्यवस्था के लिए साकची गुरुद्वारा को कहा गया। यह सीजीपीसी की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति के बीच व्यक्तिगत और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात धार्मिक आयोजनों और सिख कौम के पंथक कार्यक्रमों की हो तो संवाद बनाए रखना अति आवश्यक है। निशान सिंह के अनुसार, यदि आपसी संवाद और सहयोग की परंपरा कायम रहेगी तो केवल सिख समाज में ही नहीं बल्कि अन्य समुदायों के बीच भी एकता और भाईचारे का सशक्त संदेश जाएगा।
