jamshedpur-सीजीपीसी द्वारा जलियांवाला बाग ट्रेन सेवा रद्द होने का क्यों हो रहा है विरोध,समझिए सरल भाषा में

Daily Dose 24/7
sikh media
जमशेदपुर- सिखों की सर्वोच्च संस्था सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जो कोल्हान समेत जमशेदपुर के लगभग 34 गुरुद्वारों का नेतृत्व करता है, उक्त संस्था द्वारा आज सीजीपीसी कार्यालय में टाटानगर से अमृतसर जाने वाली जलियांवाला बाग ट्रेन सेवा को 2 दिसंबर से 28 फरवरी तक रद्द किये जाने के विरोध मे एक आपात बैठक बुलाई गई। जिसमें शहर के हर समाज के लोग शामिल हुए।
सीजीपीसी क्यों कर रही है विरोध?
दर असल दक्षिण पूर्व रेलवे ने हर साल की तरह इस साल भी 2 दिसंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक टाटानगर अमृतसर जलियांवाला बाग एक्स्प्रेस ट्रेन 18103/18104 को पूर्ण रूप से रद्द कर दिया है।
रेलवे द्वारा यह कारण बताया गया।
रेल विभाग का इस बार भी वही पुराना कारण है ठंड में कोहरा. रेलवे का कहना है कि दिसंबर से फरवरी तक नार्थ इंडिया, यूपी, पंजाब, हरियाणा में घना कोहरा पड़ता है, जिसकी वजह से ट्रेन घंटों लेट होती है, और लाइन पर एक्सीडेंट का खतरा रहता है, इसलिए इस दरमियान ट्रेन सेवा को कैंसिल कर दिया जाता है।
ट्रेन सेवा रद्द होने से यात्रियों को क्या परेशानी हो सकती है।
ये ट्रेन जमशेदपुर से हर सोमवार और बुधवार को चलती है, और लगभग 1800 किलोमीटर का सफर तकरीबन 33 घंटे में तय करती है, इस ट्रेन में सिर्फ टाटानगर से ही 700 से 800 लोग चढ़ते हैं, जिसमें ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालु होते हैं, बताते चलें कि यह ट्रेन काशी, अयोध्या, हरिद्वार, अमृतसर जैसे पवित्र स्थान पर पहुंचती है, इसी वजह से जमशेदपुर में सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अन्य समाज के संस्थाएं इस फैसले का विरोध कर रही है।
उनका कहना है कि रेलवे पिछले चार पांच साल से कोहासे के बहाने से ट्रेन बंद कर रहा है, जबकि पुरषोत्तम, राजधानी, नीलाचंल जैसी ट्रेन तो चलती रहती है।
क्या इस ट्रेन से रेलवे को हो रहा है घाटा।
नहीं बिल्कुल नहीं बल्कि रेलवे विभाग को इस ट्रेन से फायदा है, सूत्रों से मिले जानकारी के अनुसार हर फेरी मे लगभग 800 पैसेंजर इस ट्रेन में चढ़ते हैं, और पूरे रुट में लगभग 2000 पैसेंजर सफर करते हैं, 1747 किलोमीटर का लंबा रुट है, इसलिए कमाई के हिसाब से भी ये घाटे वाली ट्रेन नहीं है।
फिर क्यों इस ट्रेन को रद्द किया जा रहा है।
इसका असली 2 कारण है।
1- प्राथमिकता का खेल- राजधानी एक्सप्रेस, पुरषोत्तम, नीलाचंल जैसी ट्रेन रेलवे की मुख्य प्राथमिकता वाली ट्रेन है, उनमें “फोग पास डिवाइस” लगा होता है, उनका लोको पावरफुल होता है, और उन्हें लेट होने पर भी चलाया जाता है। जलियांवाला बाग एक्स्प्रेस ट्रेन 2 दिन वाली मेल/ एक्स्प्रेस ट्रेन है इसलिए उसकी प्राथमिकता लिस्ट नीचे है।
2- आपरेशनल मजबूरी- इस ट्रेन का टाटा छपरा के साथ शेयर होता है, इसलिए रेलवे कुहासे में सबसे पहले लंबी दूरी की नान- प्रिमीयम ट्रेन को रद्द करती है।
लेकिन यहाँ सवाल यह है कि टाटानगर से चलने वाली जलियांवाला बाग ट्रेन को ही क्यों हर बार टारगेट किया जाता है, इसी बात को लेकर सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी समेत जमशेदपुर का सिख समाज के साथ साथ अन्य समाज के लोग भी नाराज हैं। उनका सवाल भी वही है कि जब राजधानी, पुरषोत्तम, नीलाचंल जैसी गाड़ियां चल सकतीं है तो जलियांवाला बाग ट्रेन क्यों नहीं?
खास बात।
हटिया-आनंद विहार को भी हर साल रद्द किया जाता था, लेकिन वहां के सासंद के हस्तक्षेप के बाद इस साल उसको रद्द नहीं किया गया। इसलिए ऐसा लगता है कि ये मामला आपरेशनल से ज्यादा पलिटिकल विल पावर का है। और ये सिर्फ सर्दियों में रेलवे के कोहरा प्रबंधन का पुराना तरिका है।
इस बीच शहरवासियों ने कहा कि सीजीपीसी द्वारा किया जा रहा विरोध बिलकुल सही है। ट्रेन को किसी भी कीमत पर रद्द नहीं होने दिया जाएगा। इस आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों ने भी सीजीपीसी को समर्थन देने का आह्वान किया है।
ये समाचार आप सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जमशेदपुर, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गौरीशंकर रोड जुगसलाई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सोनारी,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मानगो, एवं सरदार सुरेन्द्र पाल सिंह जी “टिटू” स्टेट चेयरमैन बिल्डर्स एशोसिएशन ऑफ इंडिया ( झारखंड राज्य), गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साक्ची,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नामदा बस्ती,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सीतारामडेरा,गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी टिनप्लेट,दुपट्टा सागर बिस्टुपुर के सौजन्य से प्राप्त कर रहे हैं।
This information is based on social media and may contain errors.
Top Stories