jamshedpur-गुरु अर्जन देव जी पहले सिख गुरु थे जिन्होंने धर्म के लिए शहादत दी-गुरचरण सिंह बिल्ला

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सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव सरदार गुरचरण सिंह बिल्ला ने श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को याद करते हुए उनके शहीदी के बारे मे मीडिया को अवगत कराया।
उन्होंने श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहादत में जहांगीर के भूमिका के बारे मे एवं शहीदी का मुख्य कारण इतिहासकार क्या बताते हैं, उसकी जानकारी आम संगत से सांझा किया।
पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत में जहांगीर का रोल
जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुज़क-ए-जहांगीरी में खुद लिखा है कि गुरु अर्जन देव जी को सजा देने का हुक्म उसने दिया था। उसने लिखा: “गुरु अर्जन के घर में बहुत सालों से हिंदू और मुसलमान भोले-भाले लोग आते थे। मैं चाहता था कि या तो वह इस्लाम कबूल कर ले, या फिर सिख पंथ को बंद कर दे।
– राजनीतिक कारण: जहांगीर के बेटे खुसरो ने बगावत की थी। आरोप था कि गुरु अर्जन देव जी ने खुसरो की मदद की थी, उसे आशीर्वाद दिया और लंगर में प्रसाद दिया। जहांगीर इसे राजद्रोह मानता था।
– धार्मिक कारण: सिख पंथ तेजी से बढ़ रहा था। गुरु जी ने आदिग्रंथ साहिब का संपादन किया था। जहांगीर और कुछ कट्टर मौलवी इसे पसंद नहीं करते थे। जहांगीर ने लिखा कि गुरु जी “कुफ्र का बाजार” चला रहे हैं।
– चंदू शाह का रोल: लाहौर का दीवान चंदू शाह अपनी बेटी की शादी गुरु हरगोबिंद साहिब से करना चाहता था। गुरु जी ने मना कर दिया। बदले की भावना से चंदू ने जहांगीर के कान भरे और गुरु जी के खिलाफ भड़काया।
30 मई 1606 को जहांगीर के हुक्म पर गुरु अर्जन देव जी को लाहौर में गिरफ्तार किया गया। मुगल सूबेदार मुर्तजा खान और चंदू शाह ने यातनाएं दीं: तत्ती तवी पर बैठाना, गर्म रेत डालना, उबलते पानी में 5 दिन यातना के बाद 16 जून 1606 – ज्येष्ठ सुदी 4 – को गुरु जी रावी दरिया में जा समाए और शहीद हो गए।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक शहादत का सीधा हुक्म जहांगीर ने दिया था। वजह राजनीतिक और धार्मिक दोनों थी। चंदू शाह ने उस फैसले को हवा दी।
गुरु अर्जन देव जी पहले सिख गुरु थे जिन्होंने धर्म के लिए शहादत दी। इसी शहादत के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने मीरी-पीरी की तलवारें धारण कीं।
