Good News-124 साल बाद महाराजा रिपुदमन सिंह के वंशज का पंजाब की नाभा रियासत के नए राजा का राज्याभिषेक.

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महज 14 साल की उम्र के कुंवर अभी उदय प्रताप सिंह दिल्ली के एक इलाके में राजपूत परिवार से ताल्लुक रखने वाली मां की कोख से जन्म लेते हैं अचानक एक रात सोते हुए चिल्लाने लगे
“मेरी तलवार कहां है मुझे मेरी तलवार वापस दो मुझे अभी मेरी तलवार चाहिए” मां ने सोचा शायद बच्चा कहीं डर के मारे रात को सोते हुए बोल रहा है मां ने आम माता की तरह बच्चों को प्यार किया और सुला दिया सुबह होते ही इस बच्चे ने घर में पुराने पड़े केसरी कपड़े को फाड़ कर एक डंडी से बांधकर घर पर झंडा की तरह लहरा दिया मां बाप ने पूछा कि यह सब क्या कर रहे हो तो
बच्चे का जवाब था
” मैं राजा हूं मेरी एक रियासत है मैं इस घर के लिए नहीं बना हूं मुझे मेरे राजघराने में लेकर चलो” घर वाले अचानक से बच्चे के इस व्यवहार से घबराई हुई मुद्रा में सोचने लगे उन्होंने सब पूछ हालांकि उनका पता था कि उनके परिवार की कुछ पीडिया पूर्व में नाभा रियासत के महाराजा रिपुदमन सिंह जी के राजघराने से संबंध रहे हैं जब बच्चे को विस्तार से पूछा गया तो उसने सब बता दिया बच्चों के जिद पर उसको नाब्बा लाया गया वहां पर जो परिवार ने देखा दंग रह गए उन्होंने अपने खंडहर पड़े राजघराने को देखा जो की अभी सरकार के कब्जे में था उसे खंडहर पड़े राजघराने या गढ़ में दीवारों के अंदर पीपल के पेड़ रख चुके थे उसे बच्चों ने उन पेड़ों को देखकर अपनी मां से
“कहा कि यह पेड़ इन दीवारों में नहीं मेरे सीने में उगे हुए हैं इनको जल्द यहां से हटाओ मैं यहां रहूंगा” और इस रियासत पर राज करूंगा “मां के बताने के अनुसार बच्चा शुरू से ही अपने बाल कटवाने से मना करता था बहुत जिद करता था कि
“मैं अपने बाल नहीं कटवाने मैं सिख हूं मैं सीख मान मर्यादाओं के साथ जीना चाहता हूं” बाद में इस बच्चे को पंजाब के एक स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया आखिरकार परिवार ने उस राजघराने की लड़ाई को कोर्ट में चैलेंज किया और कहा कि यह गढ़ हमारा है कुछ टाइम कैस चला और कोर्ट ने आदेश किया की सरकार तुरंत प्रभाव से नाभा के राजगढ़ को खाली करे ताकि उसके असल मलिक उसको संभाल सके.
राजघराने के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहब प्रकाश कराया गया 2 तारीख को उसका भोग डाला गया और सीकरी तीर रिवाज के अनुसार कुमार अभी विजय प्रताप सिंह का राज्याभिषेक किया गया पंजाब की राजनीति व बुद्धिजीवियों के अंदर इस चीज को लेकर पिछले दो दिन से बहुत चर्चाएं हैं लेकिन सिख समाज को नजदीक से जन पढ़ने वाले इसको नवर रियासत में खालसा राज की शुरुआत मान रहे हैं.
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